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शनि के प्रकोप से बचने के लिए जरूरी नहीं है कि कोई बड़े पूजा-पाठ का सहारा लिया जाए। अपनी कुछ आदतों में बदलाव और व्यवहार में परिवर्तन से भी शनि के बुरे प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

  • क्यों शनि को माना गया है क्रूर

    ज्योतिष शास्त्रों में शनि को श्रम, न्याय, गरीब, मजदूर वर्ग का ग्रह माना जाता है। इसे सेवक का पद प्राप्त है। यही कारण है कि शनि आलस्य, अन्याय और गरीबों व मजदूर वर्ग के शोषण के विरुद्ध माना जाता है। शनि श्रम का देवता है इसलिए वो अपने प्रभाव में आने वाले इंसान से अधिकतम श्रम कराता है। शनि को क्रूर इसलिए माना गया है कि वो आलस और अन्याय होने पर अपने सबसे बुरे परिणाम देता है। बुरे कामों का सारा परिणाम देना शनि का काम है और वो उसमें कोई कोताही नहीं करता। इसलिए, शनि को हमेशा ही क्रूर ग्रह कहा जाता है।

  • क्या बदलाव करें आदतों में

    अगर आप शनि की ढैया, साढ़ेसाती या महादशा से परेशान हैं, पूजा-पाठ और उपायों से भी राहत नहीं मिल रही है तो आपको अपनी कुछ आदतों में बदलाव करने की आवश्यकता है।

    1 . हमारे शरीर में पैरों और पसीने में शनि का वास माना जाता है। पैर चलते रहें, मतलब श्रम होता रहे। शरीर से पसीना निकलता रहे। रात को सोने से पहले नहाने की आदत भी डालें।

    2 . अपने से छोटे कर्मचारियों और मजदूरों के साथ बुरा व्यवहार करना या उन्हें प्रताड़ित करना बंद करें। उनका सहयोग और सम्मान करें।

    3 . गरीबों की सहायता करें। गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करने की आदत डालें।

    4 . काम को टालने की प्रवृत्ति को छोड़ दें। जो भी काम हों, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाते जाएं। काम को कभी पेंडिंग ना रखें।

    5 . परिस्थितियों से डरना छोड़ें, किसी भी संकट का सामना डटकर करें। अगर आप किसी परिस्थिति से भागेंगे तो वो और ज्यादा परेशान करेगी।

    6 . पैसों के लेनदेन और इंवेस्टमेंट को लेकर सावधान रहें।

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