आयुर्वेदिक टिप्स – दैनिक रुटीन मे शामिल करे ये टिप्स बीमारियो को रखेगी आप से कोसो दूर

दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है। दूध में इतने पोषक तत्व से भरपूर होता है,जिससे न सिर्फ मांसपेशियां मजबूत बनती हैं बल्कि इससे बच्चों की लम्बाई भी बढ़ती है। आयुर्वेद के अनुसार दूध के सेवन का सही तरीका और समय बताया बताया गया। आयुर्वेद के अनुसार दूध के सेवन से दूध के पोषक तत्व बढ़ाए जा सकते हैं।

इन पोषक तत्वों से भरपूर है दूध – दूध प्रोटीन, कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी -२) युक्त होता है, इनके अलावा इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज और वसा तथा ऊर्जा भी होती है।

आयुर्वेद के अनुसार क्या हैं नियम -आयुर्वेद में मिल्कशेक की मनाही है, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार, आम, केले, खरबूजे और अन्य खट्टे फलों को कभी भी दूध   या दही के साथ नहीं खाना चाहिए।केला जब दूध के साथ मिलते  हैं, तो अग्नि (गैस्ट्रिक फायर) को कम करके आंतों पर प्रभाव डालते हैं, जिसके विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) बनते  हैं, जिससे साइनस, सर्दी, खांसी, एलर्जी, चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं

दूध के ज्यादा फायदे  के लिए इस समय करें सेवन – यदि आप अपने शरीर और मसल्स बनाना चाहते हैं, तो आप सुबह दूध होना ले सकते हैं, इसके अलावा दूध के सेवन करने के लिए रात एक बेहतर समय है। अतिरिक्त लाभों के लिए, आप इसे अश्वगंधा के साथ ले सकते हैं, जो नींद में सुधार करने और आपकी याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है। आयुर्वेद हर किसी को दूध पीने की सलाह देता है, लेकिन जिन लोगों को इससे एलर्जी उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए, लेकिन इसका सेवन करने का सबसे अच्छा समय शाम से लेकर सोने तक का समय होता है। सुबह के समय दूध का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सुबह दूध का सेवन शरीर को पचाने में भारी हो सकता है। यह आपको सुस्त भी महसूस करवा सकता है। पांच वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सुबह दूध कभी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे भारी एसिडिटी हो सकती है। यह भी सलाह दी जाती है कि नमकीन खाद्य पदार्थों के साथ दूध का सेवन न करें, जैसे दूध के साथ चाय या रोटी मक्खन।

रात के समय दूध पीने के फायदे – आयुर्वेद लोगों को शाम के समय दूध देने की सलाह देता है। रात में दूध पीना ओजस को बढ़ावा देता है। आयुर्वेद में ओजस एक ऐसी स्थिति है, जब जब आप उचित पाचन प्राप्त करते हैं। सोने से पहले दूध पीने से आप शांत हो सकते हैं और आपको नींद लाने में मदद मिल सकती है।

1. ताकत और स्फूर्ति के लिए काली  किशमिश में मौजूद नेचुरल शुगर आसानी से पच जाती है. जिससे शरीर को तुरंत ही ताकत मिल जाती है. इसमें कोलेस्‍ट्रॉल नहीं होता है. इस वजह से ये दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है.

2. पाचन क्रिया के लिए काली किशमिश खाने से हाजमा ठीक रहता है. ये पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मददगार है। कब्ज की समस्या से जूझ रहे लोगों को हर रोज काली किशमिश खाने की सलाह दी जाती है. भिगोकर खाना ज्यादा फायदेमंद है।

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3. हड्डियों के लिए काली किशमिश में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं।

4. अच्छी सेहत के लिए  काली किशमिश खाने से मोटापा कंट्रोल में रहता है। इसमें नेचुरल शुगर होती है। ऐसे में इस नेचुरल शुगर को खाने से स्वाद भी बना रहता है और सेहत भी.

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मोटापा न आने दे – आदर्श शरीर के वजन को बनाए रखेंजिसका मतलब है कि बॉडी मास इंडेक्स या बीएमआई 30 से कम होना चाहिए।

मोटापा दूर करे – मोटापा कम करने के लिए हल्दी, नीबू, पुदीना, तुलसी और अदरक को आपस में मिलाकर चटनी बना लें। इसका नियमित सेवन करें, मोटापे पर काबू पाने में सफलता मिलेगी।

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हड्डियां-मांसपेशियां मजबूत होंगी – ग्रीन-टी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी अहम है। इसमें मौजूद फ्लैवेनॉयड जहां हड्डियों-मांसपेशियों में क्षरण की शिकायत दूर रखते हैं, वहीं फाइटोएस्ट्रोजन ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचने देते। मांसपेशियों का विकास सुनिश्चित करने में भी उनकी अहम भूमिका है।

यह आपको कब्ज से राहत दिला सकता है – साबुदाना पाचन से संबंधित और कब्ज और गैस जैसी किसी भी समस्‍या से छुटकारा दिलाता है।”

साबुदाना कब्ज जैसी पेट की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि साबुदाना में प्रतिरोधी स्टार्च होता है जो पाचन तंत्र में फाइबर की तरह काम करता है और आंत के स्वास्थ्य में सुधार करता है।

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5.आपकी हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करता है – साबूदाना में कैल्शियम, मैग्नीशियम, और आयरन होता है जो हड्डियों के घनत्व को बढ़ाता है और जिससे हड्डियों के अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। यह आगे चलकर गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों से संबंधित किसी भी समस्या को रोक सकता है। ”

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साबुदाना कार्बोहाइड्रेट में उच्च है। इसलिए इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी हाई है, जो मधुमेह के रोगी में ब्लड शुगर लेवल को ट्रिगर कर सकता है।

डायबिटीज में आप साबुदाना नही खाए साबुदाना।इसलिए, यदि आप मधुमेह रोगी हैं, तो यह आपके लिए हेल्‍दी विकल्‍प नहीं है। 
डायबिटीज में लाभकारी – हल्दी डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभकारी है। इसके लिए हल्दी को  एक चम्मच आंवले के रस, एक चम्मच शहद और एक चम्मच गिलोय के रस के साथ मिलाकर पिएं।मधुमेह को नियंत्रित रखें  इसके लिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि आप समय रहते अपने आहार और जीवनशैली में जरूरी परिवर्तन करें। ताकि आपको किसी भी वजह से मधुमेह या शुगर का शिकार न होना पड़े।
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कुछ दिन बाद मुझे ऑनलाइन एक शख्स मिला। इस शख्स की लंबी दाढ़ी थी और सिर पर लंबे बाल थे। ये शख्स उस फल को लाने के लिये हमेशा कोंगो के जंगलों में आता जाता रहता था। मैंने उससे बात की और कुछ कम पैसों में ही उसे मना लिया। कुछ दिन बाद उसने मेरे घर उस जादुई फल का थोड़ा सा मिश्रण भिजवा दिया। जब ये मिश्रण आया तो मैं काफी नर्वस था। मैं अंदर से डरा हुआ था, लेकिन मुझे ये भी पता था कि मेरे पास खोने के लिये कुछ नहीं है। फिर उस रात बड़ी हिम्मत करके मैंने इसे खाना शुरू कर दिया।

(डॉ. नुस्खे )
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अपनी रसोई में या खाने की टेबल पर एक कटोरे में फल रखें। ताकि इसे खाना याद रहे और अंदर बाहर निकलते हुए भी खा सकें।

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आहार के आकार को नियंत्रित करें – आप कितना खाते हैंयह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आप क्‍या खाते हैं। अपनी थाली को ओवरलोडिंगपेट को भरा-भरा महसूस होने से बचाएं। अधिक कैलोरी खाने से हृदय रोग व अन्य रोगों यथा मधुमेह व उच्च रक्त चाप की आशंका बढ़ जाती है। रेस्तरां में परोसे जाने वाले खाने अक्सर जरूरत से ज्यादा होते हैं।अपने पोर्शन को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए एक छोटी सी थाली या कटोरे का उपयोग करें। कम कैलोरीपोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे फलों और सब्जियों का हिस्‍सा ज्‍यादा रखें। उच्च कैलोरीउच्च सोडियम खाद्य पदार्थों के छोटे हिस्सेजैसे परिष्कृतप्रसंस्कृत या फास्ट फूड। यह रणनीति आपके आहार के साथ-साथ आपके दिल को स्वस्थ और कमर के आकार को कम कर सकती है।

सब्जियां और फल ज्‍यादा खाएं – सब्जियां और फल विटामिन और खनिजों के अच्छे स्रोत हैं। सब्जियां और फल कैलोरी में कम और आहार फाइबर में समृद्ध होते हैं। अन्य पौधों या पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों की तरह सब्जियों और फलों में ऐसे पदार्थ होते हैंजो हृदय रोग को रोकने में मदद कर सकते हैं। अधिक फल और सब्जियां खाने से आपको उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों जैसे मांसपनीर और स्नैक खाद्य पदार्थों में कटौती करने में मदद मिल सकती है।

अनियमित या लंबे समय तक दर्द के साथ पीरियड्स का रहना PCOS का सबसे आम संकेत है. जैसे, साल में 9 पीरियड्स से कम होना, दो पीरियड्स के बीच में 35 दिनों से ज्यादा का अंतराल और असामान्य रूप से बहुत ज्यादा पीरियड होना.

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व्यायाम – प्राणायाममध्यम शारीरिक गतिविधि: 30 से 45 मिनट के लिए तेज चलनासप्ताह में कम से कम पांच दिन या हर रोज 10,000 कदम चलना जरूरी है। गति हेतु एक साधारण नियम है कि मौन रहकर इतना तेज चलें कि चलते हुए सांस न चढ़ेलेकिन अगर उसी गति से चलते हुए बात करें तो संस चढ़ने लगेयह हर व्यक्ति हेतु थंब रूल कहा जा सकता है।

बेहतर नींद – छह से आठ घंटे कि नींद आवश्यक है। इससे आपका हृदय रिलैक्‍स होता है और लंबे समय तक स्‍वस्‍थ रहता है।

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स्ट्रेस प्रबंधन – ध्यान मेडिटेशनसोशलसर्विसगेम क्लब आदि मेल-मिलापसैर-सपाटा परिजनों के साथ भोजन व वक्त देना आपकी हार्ट हेल्‍थ के लिए फायदेमंद है। अपनी पसंद की किताबें पढ़ना और सकारात्‍मक विचार रखना भी आपको ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से बचा सकते हैं।

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उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण – आपका ब्‍लड प्रेशर दवा से या बिना दवा के 140/90 से नीचे ही होना चाहिए। हाई ब्‍लड प्रेशर हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नियंत्रण – जहां खराब कोलेस्ट्रॉल या कम घनत्व कोलेस्ट्रॉल कम होना चाहिएवहीं गुड कोलेस्‍ट्रॉल भी मेंटेन रहना चाहिए। यह 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक ही सुरक्षित है।

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5 नींद – कीवी की नींद को बढ़ावा देने वाले प्रभावों को सेरोटोनिन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सेरोटोनिन एक मस्तिष्क रसायन है जो आपके स्‍लीप साइ‍कल को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, कीवी में एंटी इंफ्लामेटरी जैसे कि विटामिन सी और कैरोटीनॉयड होते हैं। ये नींद को बढ़ावा देने वाले प्रभावों को प्रेरित करने के लिए भी जिम्मेदार हैं।

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बिस्तर से उठते ही मूत्र त्याग के पश्चात उषा पान अर्थात बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित कई रोगों से हमारा बचाव करती है।

भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

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यदि #नींद न आने की शिकायत है, तो रात्रि में सोते समय तलवों पर सरसों का तेल लगाएँ।*

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ankit1985

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