अंजीर खाने के फायदे,

क्या है अंजीर? – What are Figs in Hindi?

अंग्रेजी में इसे फिग कहा जाता है, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम फिकस कैरिका (Ficus carica) है। वैज्ञानिक तौर पर माना जाता है कि यह शहतूत परिवार का सदस्य है। इसके फल का रंग हल्का पीला होता है, जबकि पकने के बाद गहरा सुनहरा या बैंगनी हो सकता है।अंजीर के पेड़ की छाल चिकनी और सफेद रंग की होती है। इसका पेड़ मुख्य रूप से सूखे और धूप वाली जगह पर तेजी से उगता है और जड़ बेहद गहरी होती हैं। साथ ही यह पहाड़ी क्षेत्र में भी आसानी से पनप सकता है। इसके पेड़ की ऊंचाई 9- ईरान, भारत और मध्य-पूर्व के देशों में रहने वाले इसका सेवन अधिक मात्रा में करते हैं।

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इसे स्थानीय भाषाओं में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे – तेलुगु में अथी पल्लू, तमिल और मलयालम में अती पाजम, कन्नड़ में अंजुरा और बंगाली में दुमूर कहा जाता है। जहां इसका फल जून से सितंबर तक मिलता है, वहीं ड्राईफ्रूट के तौर पर यह सालभर बाजार में उपलब्ध रहता है। इसका टेस्ट सबसे अलग और अनोखा होता है। जहां इसका बाहरी हिस्सा बेहद मुलायम होता है, वहीं अंदर इसके बीज हल्के कुरकुरे होते हैं, जो इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं। साथ ही अंजीर के गुण कई प्रकार से लाभकारी हैं।

अब अंजीर के विभिन्न प्रकारों की बात करते हैं। उसके बाद अंजीर के फायदे जानेंगे।

अंजीर के प्रकार – Types of Figs in Hindi

मुख्य रूप से अंजीर के पांच प्रकार माने गए हैं। हर प्रकार का अपना अलग स्वाद व मिठास है। अंजीर के विभिन्न प्रकार इस तरह हैं :
  1. ब्लैक मिशन (Black Mission) : बाहर से इसका रंग काला या हल्का बैंगनी होता है, जबकि अंदर से गुलाबी होता है। यह अंजीर न सिर्फ खाने में मीठी होती है, बल्कि इसमें रस भी होता है। इसे केक या खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
  2. कडोटा (Kadota) : यह अंजीर हरे रंग की होती है और बैंगनी रंग का गूदा होता है। यह अंजीर के सभी किस्मों में सबसे कम मीठी होती है। इसे कच्चा खाया जा सकता है, लेकिन इसे गर्म करके और ऊपर हल्का नमक डालकर भी खाया जा सकता है।
  3. कैलीमिरना (Calimyrna) : यह बाहर से हरे-पीले रंग की होती है। इसका आकार अन्य किस्मों के मुकाबले सबसे बड़ा होता है और इसका स्वाद भी सबसे अलग होता है।
  4. ब्राउन तुर्की (Brown Turkey) : इस अंजीर का बाहरी रंग बैंगनी और गूदा लाल होता है। इसका स्वाद हल्का और कम मीठा होता है। इसका प्रयोग सलाद का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  5. एड्रियाटिक (Adriatic) : इसकी बाहरी परत हल्की हरी और अंदर से गुलाबी होती है। इसका रंग हल्का होने के कारण इसे सफेद अंजीर भी कहा जाता है। यह सबसे मीठी होती है और इसे फल के तौर पर खाया जा सकता है।

1. पाचन तंत्र

अंजीर का सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर हो सकती है और पाचन तंत्र अच्छी तरह काम करने लगता है। पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए दो-तीन अंजीर को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह ऐसे ही या फिर शहद के साथ खाएं।

पाचन तंत्र को बेहतर करने और कब्ज को जड़ से मिटाने के लिए फाइबर की जरूरत होती है। अंजीर में पर्याप्त मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। इसलिए, जब अंजीर का सेवन किया जाता है, तो इसका फाइबर गुण पेट को साफ करने में मदद कर सकता है। शरीर से मल आसानी से बाहर निकल जाता है। अंजीर में फाइबर होने के कारण इसके सेवन से दस्त भी ठीक हो सकते हैं । इस प्रकार पेट के लिए अंजीर फायदेमंद है।

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 कम वजन

अगर कोई वजन कम करने के बारे में सोच रहा है, तो अंजीर की मदद ले सकता है। अंजीर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और कैलोरी कम होती है। अंजीर का सेवन करने से भूख कम लगती है, जिससे आप अधिक भोजन करने से बच जाते हैं। अंजीर के सेवन से शरीर में मेटाबॉलिज्म का स्तर बेहतर होता है और शरीर में जमा अतिरिक्त वसा भी कम होती है। अंजीर में फिसिन नामक एंजाइम भी होता है, जो भोजन को सही प्रकार से पचाने में मदद करता है। जब भोजन सही से और समय पर पच जाता है, तो शरीर में अतिरिक्त वसा जमा नहीं होती और वजन बढ़ने की चिंता नहीं रहती

वजन कम करने में अंजीर का फायदा तभी होगा, जब इसे संतुलित मात्रा में खाया जाए। इसे अधिक मात्रा में लेने से शरीर में कैलोरी और कार्ब्स का स्तर बढ़ सकता है, जो वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।

 कोलेस्ट्रॉल

अंजीर में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होता है, जो रक्त से खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है  साथ ही अंजीर का फाइबर गुण पाचन तंत्र से भी अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को साफ कर सकता है। अंजीर में विटामिन-बी6 भी होता है, जो सिरोटोनिन का निर्माण करता है। सिरोटोनिन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर मूड को अच्छा कर सकता है। अंजीर में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड व फाइटोस्टेरोल जैसे गुण भी होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने का काम कर सकते हैं।

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 एनीमिया

शरीर में आयरन की कमी होने पर एनीमिया होता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी घातक साबित हो सकती है। सूखी अंजीर को आयरन का प्रमुख स्रोत माना गया है। इसके सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है

मासिक धर्म के समय और गर्भावस्था के समय कई महिलाएं एनीमिया की शिकार हो जाती हैं। इससे उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, अगर कोई बीमार है या फिर किसी तरह की सर्जरी हुई है, उस अवस्था में भी एनीमिया हो सकता है। इससे बचने के लिए अंजीर को अपनी डायट में शामिल करना चाहिए। अंजीर के सेवन से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है और शरीर किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में सक्षम हो जाता है

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 डायबिटीज

अंजीर के फल के साथ उसके पत्ते भी सेहत के लिए अच्छे हैं। अंजीर के पत्तों में ऐसे कई गुणकारी तत्व मौजूद हैं, जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है कि अगर भोजन में अंजीर के पत्तों को शामिल किया जाता है, तो ये डायबिटीज से लड़ने में मदद कर सकते हैं  इसलिए, अंजीर खाने के फायदे (anjeer khane ke fayde) में डायबिटीज का इलाज भी शामिल हैं।

डायबिटीज से बचने या फिर उसके प्रभाव को कम करने के लिए अंजीर की चार-पांच पत्तियों को गर्म पानी में उबाल लें और उसे उबालकर पिएं। इसके अलावा, अंजीर के पत्तों को पहले सुखा लें और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लें। इसके बाद पाउडर को एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। अब इस चाय का सेवन करें।

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अस्थमा

अंजीर अस्थमा से भी बचाने में भी सक्षम है। मेथी दाने के पाउडर को शहद और अंजीर के साथ लेने से अस्थमा काफी हद तक ठीक हो सकता है। अस्थमा के मरीज अंजीर का जूस भी पी सकते हैं। इससे उन्हें कुछ हद तक लाभ हो सकता है। अंजीर के सेवन से शरीर के अंदर म्यूकस झिल्लियों को नमी प्रदान होती है और कफ साफ होता है, जिससे अस्थमा के मरीज को कुछ राहत मिलती है। अंजीर में फाइटोकेमिकल यौगिक भी होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। अगर फ्री रेडिकल्स शरीर में बने रहें, तो अस्थमा को और गंभीर बना सकते हैं।

ankit1985

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