दिमाग की सोच में छिपा है लंबी आयु का रहस्य

आपका मूड, भावनाएं और विचार शरीर पर प्रभाव डालते हैं. आराम करने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है. अवसाद दूर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसलिए सवाल उठता है कि अगर दिमाग शरीर को दुरुस्त कर सकता है तब क्या वो उसे फिर से जवान बना सकता है? क्या वो अपनी बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है?

इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे सोचने का तरीका बीमारी से लड़ने वाले सफ़ेद रक्त कणों को बढ़ाता है. ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन्स को नियंत्रित करता है. इसलिए वो क्यों नहीं हड्डियों को मज़बूत बना सकता है या दिल की बीमारी को टाल सकता है. या वो आयु बढ़ाने के साथ ख़त्म हो रही मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रख सकता है.

 

 

हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर एलीन लैंगर की एक स्टडी केवल एक दिन एकाग्रता से ध्यान करने पर बुढ़ापे को बढ़ावा देने वाले जीन को नियंत्रित कर सकते हैं. 1970 के दशक में शोधकर्ताओं ने बुढ़ापा रोकने के लिए दिमाग के उपयोग पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया. लैंगर की- काउंटर क्लॉक वाइस- स्टडी ने इसकी शुरुआत की थी. उन्होंने 1979 में एक स्ट्रीट में 70 वर्ष से अधिक आयु के आठ पुरुषों को पांच दिन के लिए रखा. इन सबका स्वास्थ्य न अच्छा था और न ही खराब. लेकिन, उनपर आयु का प्रभाव दिखता था. ये रिट्रीट पुराना मठ था. इसे 1959 की दुनिया के हिसाब से डिज़ाइन किया गया. पुराने टीवी पर पुराने कार्यक्रम दिखाए गए. 50 साल पुराने रेडियो पर पुराने गाने बजाए गए. उनकी बातचीत 1959 के विषयों पर केंद्रित रही. वहां से सभी आइने हटा दिए गए. पुरुषों की शारीरिक, मानसिक स्थिति जानने के लिए कई टेस्ट करवाए गए. सभी मापदंडों पर पुरुषों का परफॉरमेंस बेहतर रहा. कई मामलों में उनके परिणाम दस या बीस वर्ष छोटे पुरुषों जैसे रहे.

 

बेचैनी और चिंता की स्थिति बुढ़ापे को पास बुलाती है. जब हम चिंतित होते हैं तो नर्वस सिस्टम अनुमान लगाता है कि जीवन के लिए कोई खतरा पैदा हो गया है. मस्तिष्क एड्रेनल ग्लैंड को संकेत भेजता है. ग्लैंड होर्मोन छोड़ती है. ये होर्मोन इम्यून सिस्टम को प्रोटीन छोड़ने का सिग्नल देते हैं. प्रोटीन संभावित हमले की जगह पर सफ़ेद रक्त कणों और अन्य लड़ाके भेजती है. वास्तव में कोई हमला, चुनौती या घाव होने की स्थिति में सिस्टम काम करता है. यदि आप हमेशा अपने बॉस, सहयोगियों, परिवार के लोगों से लड़ते हैं. मामूली बातों को लेकर चिंतित होते हैं तब शरीर से उत्तेजक केमिकल्स बढ़ जाते हैं. ये केमिकल कैंसर, दिल की बीमारियों, दिमाग की गड़बड़ी पैदा करते हैं. इसी के साथ वे अपने बुढ़ापे को न्योता देते हैं.

शोधकर्ताओं का मानना है कि अच्छा भोजन, पर्याप्त नींद, एक्सरसाइज, सकारात्मक नजरिया लम्बे जीवन के आसान रास्ते हैं. इस बात पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है कि चिंता, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली से शरीर को नुकसान पहुंचा चुके अधेड़ लोगों को सोचने के तरीके में बदलाव और ध्यान से कितना फायदा होगा. लेकिन, ऐसी रिसर्च लगातार सामने आ रहीं हैं कि इससे फायदा है और कोई नुकसान तो निश्चित रूप से नहीं होगा.

 

 

डॉ नुस्खे हॉर्स पावर किट आर्डर करने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करे या Call या Whatsapp 7428858589 करे

http://wassmee.us/w/?c=d5ac

ankit1985

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

कमजोर शरीर को मोटा बनाये आयुर्वेदिक औषधि के साथ

Tue Jul 23 , 2019
आपका मूड, भावनाएं और विचार शरीर पर प्रभाव डालते हैं. आराम करने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है. अवसाद दूर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसलिए सवाल उठता है कि अगर दिमाग शरीर को दुरुस्त कर सकता है तब क्या वो उसे फिर से जवान […]
Loading...
Loading...