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दोस्तो अपने देखा होगा कि महिला के प्रेगनेंट होने पर घरवालों के मन में एक ही सवाल सबसे पहले आता है कि लड़का होगा, या लड़की || बड़ी-बूढ़ियां को तो पुराने जमाने की अल्ट्रासाउंड मशीन कहा जा सकता है
जो गर्भवती स्त्री की चाल-ढ़ाल देखकर ही ये बता देतीं हैं कि लड़का होगा या लड़की | क्योंकि उनके बताए हुए नुश्खे बहुत सटीक बेठते है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसे बहुत से लक्षण होते हैं जो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग से जुड़े होते हैं. जैसे अगर गर्भ ऊंचा हो तो लड़की होगी, गर्भवती को मीठा खाने की इच्छा हो तो लड़की और नमकीन खाने की इच्छा हो तो लड़का होता है, अगर चेहरे का निखार चला जाए तो समझो सारा निखार गर्भ में पल रही लड़की ने चुरा लिया है,
मॉर्निंग सिकनेस महसूस हो तो लड़की होगी, और भी न जाने क्या-क्या बातें सुनने को मिलती हैं. पर हां, ये सभी बातें भरोसा करने लायक नहीं है, इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, ये महज भ्रम हैं | लेकिन कई बार ये सच साबित हो जाती है। महिलाए कहती है कि उनके साथ ऐसा हो चुका है। ऐसे लक्षण उनमे पाए गए है।और बाद में डिलिवरी के बाद जो उन्होंने सोचा वो सच निकला ।
अभी हाल ही में किए एक रिसर्च में पाया गया कि मां की इम्यूनिटी (इम्यून सिस्टम )यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता का बच्चे के जेंडर से संबंध होता है. 80% प्रेग्नेंट महिलाओं पर किया गया यह शोध Brain,
Behaviour and Immunity जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
बिहेवियरल मेडिसन रिसर्च इंस्टिट्यूट में पोस्ट डॉक्टरल शोधकर्ता एमैंडा मिशेल बताती हैं कि लड़कों की मां की तुलना में, गर्भ में लड़की को पाल रही महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता की जब कड़ी परीक्षा ली गई तब बहुत ही उत्तेजक प्रतिक्रिया आई.’
 
मैलिसा को बचपन में एलर्जी थी, जो उम्र के साथ खत्‍म हो गई. वे बाद में दो बार मां बनीं. जिसमें पहली बार बेटे को जन्‍म दिया- मैलिसा एकदम स्‍वस्‍थ थीं और उन्‍होंने एक सेहतमंद बच्‍चे को जन्‍म दिया. दूसरी बार बेटी हुई- गर्भवती होने पर मैलिसा को एलर्जी फिर से लौट आई, और वो इतनी गंभीर थी कि उन्हें हर रोज दवाएं खानी पड़ती थीं.
विदेशों में लोग भले ही लिंग परीक्षण कराकर गर्भ में पल रहे बच्चे के जेंडर के बारे में जान लेते हैं, और जेंडर के हिसाब से ही बच्चे के आने की तैयारियां करते हैं, लेकिन मजा तो नौ महीने इंतजार के बाद मिलने वाले सरप्राइज में ही आता है. क्या होने वाले है, ये जानना किसे है?? यही है भारत के भविष्य की एक सुखद तस्वीर.
आज लोग ये जानना चाहते हैं कि आने वाला मेहमान कौन होगा? शायद वक्त अब पहले जैसा नहीं रहा. कुछ कट्टरपंथी लोगों को छोड़ दें तो अब लड़का हो या लड़की दोनों का स्वागत किया जाता है. लड़की के होने पर भी थालियां बजाई जाती हैं और खुशियां मनाई जाती हैं.

गर्भ में लड़की होने के लक्षण
दोस्तो पहले हमने जाना कि लड़का होने के लक्षण अब हम जानेंगें गर्भ में लड़की होने के लक्षण
1.पेट की स्थिति
अगर किसी महिला के  गर्भ ठहरने के बाद पेट नीचे की अपेक्षा ऊपर की तरफ उभर रहा हो तो इससे भी लड़की होने का अंदाजा आप लगा सकते है।
2.स्किन की कोमलता
अगर किसी महिला के स्किन में कोमलता आ जाती है। यानी कि बिकलुल बच्चे की स्किन की तरह हो जाती है।तो अनुमान लगा सकते है कि गर्भ में लड़की है।

3.महिला का स्वभाव

महिला का स्वभाव पर भी इसका असर दिखाई देता है। गर्भ में लड़की होंती है तो गर्भवती का मूड बहुत स्विंग रहता है।बहुत चिड़चिड़ा सा उसका स्वभाव हो जाता है।

4.सुबह के समय थकावट व कमजोरी

मॉर्निंग सिकनेस अगर गर्भवती महिला को ज्यादा हो तो इससे भी लड़की होने का अंदाज लगा सकते है।
 

5.महिला के बालों की प्रोब्लम
अगर महिला के बाल बहुत ज्यादा झड़ते है या बहुत ज्यादा पतले हो गए है तो भी गर्भ में लड़की होने के चांस ज्यादा होते है

6.चेहरे पर दाग धब्बे
अगर गर्भवती महिला के चेहरे पर बहुत ज्यादा पिम्पल्स मुहासे फुंसी फोड़े हो गए है तो भी आप सोच सकती है कि आने वाला बच्चा लड़की होगी।

7.गर्भ में बच्चे की हलचल

गर्भवती महिला जब लेटती है तो बच्चे का हिलने डुलने का अगर ज्यादा अनुभव नही हो रहा हो।तो भी गर्भ में कन्या हो सकती है।

8.अत्यधिक चर्बी का बढ़ना
अगर गर्भ में लड़की होती है तो महिला के कूल्हों ओर जांघो पर बहुत ज्यादा चर्बी इकठ्ठा हो जाती है।और महिला का बजन पहले से ज्यादा हो जाता है।

9.चेहरे पर निखार
गर्भ में लड़की होती है तो गर्भवती स्त्री के चेहरे पर तेज होता है। उसका चेहरा चमकता है।इसके विपरीत होने पर लड़का होता है।

10.गर्भ पर मौसम का फर्क
ऐसा भी कहा जाता है।अगर किसी महिला का गर्भ गर्मियों में ठहरता है।तो अगले 9 महीने बाद लड़की होने की सम्भवना होती है।

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