घरेलु टिप्स – इन टिप्स से करे गंभीर से गंभीर जॉइंट पैन को दूर

इस लॉकडाउन में हर रोगी की तरह ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त लोगों की परेशानियां भी बढ़ीं। बाहर न निकलने से धूप नहीं मिल पाती, जो विटामिन डी का अहम स्रोत है। दूसरी ओर घर में रहने से सक्रियता कम होती है, जिससे हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं। खासतौर पर उम्रदराज लोगों के लिए यह स्थिति बुरी होती है। 20 अक्तूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कैसे रखें हड्डियों की सेहत को दुरुस्त।

ऑस्टियोपोरोसिस लैटिन भाषा से निकला शब्द है, जिसका अर्थ है-पोरस बोन्स यानी भुरभुरी हड्डियां। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का लचीलापन कम होता है, उनके बीच का गैप बढ़ने लगता है। मेनोपॉज के बाद भी हड्डियों की सेहत कमजोर होने लगती है। इसके अलावा आनुवंशिक कारणों से भी हड्डियों की सेहत प्रभावित होती है। 30 की उम्र के बाद क्षतिग्रस्त हड्डियों की भरपायी मुश्किल होती है। निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा या अत्यधिक दुबलापन, गलत खानपान भी हड्डियों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

किसे है ज्यादा खतरा – फोर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज, नई दिल्ली के डायरेक्टर एवं एचओडी ऑर्थोपेडिक्स डॉ. गुरिंदर बेदी कहते हैं, ‘निष्क्रिय जीवनशैली वाले उम्रदराज लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा सर्वाधिक है। मोटापा तो हड्डियों का दुश्मन है ही, इसके अलावा सबसे ज्यादा खतरा है दुबले लोगों को। अगर उनका वजन लंबाई के मुकाबले कम हो और मसल मास बहुत कम हो तो उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

परिवार में पहले से माता-पिता या किसी अन्य को यह समस्या हो तो बहुत संभावना है कि अगली पीढ़ियों में भी यह स्थानांतरित हो जाए। परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर यानी कूल्हे, पीठ, बांह के ऊपरी हिस्से और कलाई का फ्रैक्चर रहा हो, लंबे समय तक स्टेरॉयड का सेवन किया हो, रूमेटाइड अर्थराइटिस और इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस जैसी समस्या हो, पोषक तत्वों के न पचने जैसी समस्याएं हों जैसे-सीलिएक रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस, लंबे समय तक एंटीपाइलेप्टिक व कैंसर की दवाएं ली हों, अर्ली मेनोपॉज हुआ हो, धूम्रपान या शराब के आदी हों या फिर किडनी और लिवर की गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हों तो ऐसे लोगों की हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं। इनमें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।’

कोरोना दौर में बढ़ी समस्याएं डब्ल्यू प्रतीक्षा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में ऑर्थोपेडिक्स के डायरेक्टर और हेड डॉ. हेमंत शर्मा कहते हैं कि हालांकि अभी ऐसे कोई सर्वे या अध्ययन नहीं हुए हैं, इसलिए सटीक आंकड़े नहीं दिए जा सकते लेकिन पहले से बीमार लोगों की समस्याएं इस दौरान बढ़ी हैं क्योंकि लोग अस्पताल जाकर जांच कराने में डर रहे हैं। ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिनका वजन लॉकडाउन में बढ़ गया और उन्हें हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। कुछ मामलों में यह भी देखने को मिला कि जो युवा दौड़ रहे थे या साइकिल चला रहे थे, उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा नहीं ली, जिस कारण वे गिरे, चोट लगी और लिगामेंट इंजरी हो गई। दो तरह के एक्स्ट्रीम हैं।

कुछ लोगों की समस्याएं इसलिए बढ़ीं क्योंकि वे घर में रहकर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और कुछ लोगों ने जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर लिया। व्यायाम करना सबके लिए जरूरी है लेकिन इससे पहले अपनी शारीरिक अवस्था को ध्यान में रखना भी अनिवार्य है। ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें थाइरॉएड है, वे स्टेरॉयड या पेनकिलर्स ले रहे हैं, तो उनका वजन तेजी से बढ़ता है और घर में बैठे रहने से मसल्स कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में अपने खानपान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

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सही खानपान से होगा बचाव-  
अगर 30 की उम्र से ही अपने खानपान और सक्रियता पर ध्यान दिया जाए तो समस्या से बचाव संभव है। धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल नई दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन सर्जरी निदेशक डॉ. राजेश कुमार वर्मा कहते हैं, कैल्शियम व विटामिन डी की कमी ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ाती है। इसी तरह डायबिटीज, हाइपोथाइरॉएड, गठिया आदि में सेकेंड्री ऑस्टियोपोरोसिस होना आम बात है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत बहुत प्रभावित होती है। ऐसे में अपने खानपान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आजकल कई लोग प्लांट बेस्ड डाइट लेते हैं और एनिमल प्रोटीन को नजरअंदाज कर देते हैं। दूध और दूध से बनी चीजों का परहेज करना हड्डियों के लिए अच्छा नहीं होता।

जानें हड्डियों की सेहत के लिए कौन-कौन से पोषक तत्व जरूरी हैं-
कैल्शियम की कमी न हो : हर दिन कितनी मात्रा में कैल्शियम लें, यह व्यक्ति की उम्र के हिसाब से तय होता है। आमतौर पर 24 घंटे में लगभग 800 से 1500 मिलीग्राम कैल्शियम लेने की सलाह दी जाती है। दूध के गिलास या दही की कटोरी में करीब 300 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। टोफू, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियों, पनीर, चीज, आंवला से भी कैल्शियम मिल सकता है। यह सही है कि भोजन से मिलने वाला कैल्शियम बेहतर होता है लेकिन कई बार किसी खास बीमारी और पाचन संबंधी समस्या के कारण कैल्शियम टैब्लेट या सप्लीमेंट्स भी लेने पड़ सकते हैं।

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फैट्स का सही अनुपात : हड्डियों की मजबूती के लिए पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स (पूफा) का भी सही तालमेल होना चाहिए। इसमें ओमेगा-6 (मीट और ग्रेन्स) और ओमेगा-3 (अलसी के बीज, मछली और अखरोट) का सही अनुपात होना चाहिए।

विटामिन डी : हफ्ते में एक या दो बार सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच सीधे सूर्य की रोशनी में करीब 15 मिनट तक रहें। कपड़ों या सनस्क्रीन से त्वचा को ढकने का प्रयास न करें। हर दिन 1000-2000 आईयू (इंटरनेशनल यूनिट) विटामिन डी लेना अच्छा समझा जाता है। हमारे देश में 80 फीसदी आबादी में विटामिन डी की कमी है। डॉ. बेदी के अनुसार, इसके लिए विटामिन डी के सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। इसकी सबसे सामान्य दवा 60,000 आईयू के टैबलेट, सैशे या लिक्विड हैं, जिसे शुरुआत में 6 से 8 हफ्ते के लिए दिया जाता है। इसके बाद, साल भर तक महीने में इसे दो बार लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि सूरज की रोशनी विटामिन डी लेने का सबसे बेहतरीन तरीका है।

मैग्नीशियम और पोटैशियम : हरी पत्तेदार सब्जियों, खासतौर पर पालक, बीज, नट्स और साबुत अनाजों में मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसी तरह आलू, केला, मशरूम, खीरा, अनार, टमाटर आदि में पोटैशियम पाया जाता है। डायबिटीज से ग्रस्त लोग आलू, केला और अनार के अलावा बाकी चीजें खा सकते हैं।  

ये भी हैं जरूरी : हड्डियों की सेहत में विटामिन बी-12, के और सी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। डेयरी उत्पादों, अंडा, मछली में विटामिन बी-12 की प्रचुर मात्रा होती है। सप्ताह में 2-3 दिन इनका सेवन अवश्य करें। खट्टे फलों जैसे-नीबू, संतरा, आंवला, टमाटर, कीवी और अमरूद आदि में विटामिन सी भरपूर पाया जाता है। इसी तरह बंद गोभी, फूलगोभी, पालक, सोयाबीन, ग्रीन टी आदि में विटामिन के पाया जाता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए लाभदायक है।

स्वस्थ रहना है तो सक्रिय रहें
पौष्टिक और संतुलित खानपान के साथ ही सही व्यायाम भी जरूरी है। डॉ. बेदी कहते हैं, नियमित पैदल चलना-व्यायाम करना और पॉस्चर का ध्यान रखना आवश्यक है। घर से बाहर वर्कआउट कर रहे हैं तो ऐसी गतिविधियां करें, जिनमें पैरों पर वजन पड़े। दक्षिण एशियाई लड़कियों में उम्र बढ़ने पर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक होता है, इसलिए लंबी दूरी तक टहलना और दौड़ना अच्छी गतिविधियां हैं।

डॉ. हेमंत शर्मा कहते हैं कि सप्ताह में चार-पांच दिन 45 मिनट ब्रिस्क वॉक करें, साइक्लिंग भी कर सकते हैं। दो दिन वॉक, दो दिन साइक्लिंग, एक दिन बैडमिंटन जैसे खेलों में भी हिस्सा ले सकते हैं। व्यायाम से पहले काफ स्ट्रेचिंग जरूर करें। हार्ट प्रॉब्लम है तो कोई भी व्यायाम करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। चलने में असमर्थ लोग खड़े होकर इलेस्टिक बैंड से स्ट्रेचिंग कर सकते हैं। स्वस्थ लोगों के लिए सीढ़ियां चढ़ना-उतरना बहुत अच्छी एक्सरसाइज है।

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मिटेंगे बढ़ती उम्र के निशान चेहरे पर पड़ती महीन रेखाएं और झुर्रियों को देखकर परेशान होती हैं? होना लाजमी भी है। कैस्टर ऑयल के नियमित इस्तेमाल से इन्हें कम किया जा सकता। ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि इस तेल को त्वचा अच्छे से सोखती है और इससे कॉलेजन का निर्माण बढ़ता है। इससे त्वचा को भरपूर मात्रा में नमी मिलती है और त्वचा की महीन रेखाएं व झुर्रियां कम दिखती हैं। इसके लिए आप कैस्टर ऑयल और ऑलिव ऑयल को मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

यह है प्राकृतिक मॉइस्चराइजर आपकी त्वचा रूखी है और आप केमिकल वाले मॉइस्चराइजर से दूर रहना चाहती हैं तो ऐसे में सही विकल्प की तलाश खासी कठिन हो जाती है। आपके ड्रेसिंग टेबल पर अगर कैस्टर ऑयल की शीशी मौजूद है तो यकीन मानिए कि आपकी यह तलाश पूरी हो गई है। यह तेल त्वचा को रूखा नहीं होने देता। इसके लिए एक शीशी में बराबर-बराबर मात्रा में कैस्टर ऑयल और नारियल तेल मिलाकर रख लें। इस तेल को दिन में दो बार अपनी त्वचा पर लगाएं। दागों को भगाता है दूर त्वचा पर दाग-धब्बे भला किसको अच्छे लगते हैं? थोड़े से धैर्य और कैस्टर ऑयल की मदद से आप इनसे भी निजात पा सकती हैं। इस तेल में मौजूद फैटी एसिड त्वचा की गहराई तक जाकर हेल्दी टिश्यू बनाता है ताकि आपकी त्वचा को दाग और धब्बों से निजात मिल सके। आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल वाली जगह पर कैस्टर ऑयल से मालिश करने से वह भी खत्म हो जाते हैं।

मिटेंगे स्ट्रेच माक्र्स बहुत ज्यादा वजन कम होने और गर्भावस्था की वजह से पड़ने वाले स्ट्रेच माक्र्स कई बार आपकी शर्मिंदगी का कारण बने होंगे। है न? अगर हां, तो यह तेल आपके इन दागों को कम करने में भी मदद करेगा। इसके लिए आपको रोज पंद्रह से बीस मिनट तक इस तेल से समस्या वाली जगह पर मालिश करनी होगी। नियमित इस्तेमाल से दाग हल्के होने शुरू हो जाएंगे। मुहांसों को कहें चल हट मुहांसे टीनएज से ही लड़कियों का पीछा करते हैं। इनसे पीछा छुड़ाने के लिए आप ढेरों जतन कर चुकी होंगी। कैस्टर ऑयल के इस्तेमाल से मुहांसे भी छूमंतर हो जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो लीजिए, इससे बंद पोर्स खुल जाएंगे। फिर कैस्टर ऑयल को रातभर लगाकर सुबह ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लीजिए। इससे मुहांसों की समस्या कुछ ही दिनों में दूर हो जाएगी।

मोटापा दूर करे 
मोटापा कम करने के लिए हल्दी, नीबू, पुदीना, तुलसी और अदरक को आपस में मिलाकर चटनी बना लें। इसका नियमित सेवन करें, मोटापे पर काबू पाने में सफलता मिलेगी।

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सिर की सेहत होगी दुरुस्त बालों की तमाम समस्याओं की शुरुआत होती है, स्कैल्प से। लिहाजा, बालों को स्वस्थ्य रखने के लिए स्कैल्प का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। कैस्टर ऑयल में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल गुण भी होते हैं, इसके चलते वह स्कैल्प की तमाम समस्याओं से निजात दिलाता है। इस तेल में रिसिनोलिक एसिड भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो कि रक्त प्रवाह बेहतर करता है। अगर आप इस तेल का प्रयोग सिर पर करेंगी तो बाल तेजी से बढ़ेंगे।

डायबिटीज में लाभकारी

हल्दी डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभकारी है। इसके लिए हल्दी को  एक चम्मच आंवले के रस, एक चम्मच शहद और एक चम्मच गिलोय के रस के साथ मिलाकर पिएं।

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दूध के साथ हल्दी का सेवन 
हल्दी, मंजिष्ठा, गेरू, मुलतानी मिट्टी, गुलाब जल, एलोवेरा एवं कच्चे दूध को मिलाकर लेप तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है। हल्दी वाला दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है।

यदि आप नजले, जुकाम, खांसी से परेशान हैं, तो गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं, इससे लाभ होगा।
रोज सुबह खाली पेट गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करें, तो शरीर के दर्द, पेट के रोग आदि से छुटकारा पा सकते हैं।

रक्त की सफाई करे हल्दी 
हल्दी के सेवन से रक्त साफ होता है।  इसके सेवन से रक्त में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। अगर चोट लगने पर तेजी से खून बह रहा है, तो आप उस जगह तुरंत हल्दी डाल दें।  इससे खून बहना रुक जाएगा।

स्त्रियों के लिए हल्दी का उपयोग 
महिलाओं में होने वाले श्वेत प्रदर या ल्युकोरिया जैसे रोगों में हल्दी अत्यंत गुणकारी औषधि है। इसके लिए पांच ग्राम हल्दी और अंजीर के तीन टुकड़े का सेवन करने से लाभ होता है।

’हल्दी, खाने वाला चूना और शहद का लेप  बना कर इसे मोच, ऐंठन, चोट  या शरीर में आई सूजन वाली जगह पर लगाने से तुरंत लाभ होता है।
’एनीमिया, पीलिया, बवासीर, सांस के रोग और लगातार हिचकी आने की स्थिति में हल्दी और काली मिर्च के धुएं  को सूंघने से लाभ होता है।

अनियमित पीरियड्स- अनियमित या लंबे समय तक दर्द के साथ पीरियड्स का रहना PCOS का सबसे आम संकेत है. जैसे, साल में 9 पीरियड्स से कम होना, दो पीरियड्स के बीच में 35 दिनों से ज्यादा का अंतराल और असामान्य रूप से बहुत ज्यादा पीरियड होना.

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’चर्म रोगों में एक चम्मच कच्ची हल्दी और एक चम्मच आंवले के रस को पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
’देसी घी से यदि दुर्गंध आ रही हो, तो उसे दूर करने के लिए हल्दी के पत्तों को पीसकर घी के साथ उबाल लें। इसके बाद इसे छान लें। इससे घी की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
’खुजली, दाद या त्वचा पर चकत्ते पड़ जाने पर हल्दी को गौ मूत्र के साथ मिलाकर इसका लेप प्रभावित जगह पर लगाएं, इससे जल्द आराम मिलेगा।

मोटापा दूर करे 
मोटापा कम करने के लिए हल्दी, नीबू, पुदीना, तुलसी और अदरक को आपस में मिलाकर चटनी बना लें। इसका नियमित सेवन करें, मोटापे पर काबू पाने में सफलता मिलेगी।

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मौसमी रोगों में फायदेमंद
’हल्दी की गांठों को नियमित रूप से चूसने से खांसी में राहत मिलती है। खांसी में हल्दी को भूनकर आधा चम्मच शहद या देसी घी के साथ खाने से भी लाभ होता है।
’जुकाम होने पर हल्दी पाउडर या हल्दी की गांठ को चूल्हे पर गर्म कर इससे निकलने वाले धुएं को सूंघें, लाभ होगा।
’सिरदर्द होने या चक्कर आने पर हल्दी का लेप सिर पर लगाने से लाभ होता होता है।
बरतें सावधानी

हल्दी का सेवन 3 से 5 ग्राम की मात्रा में ही करना चाहिए। विशेष स्थिति में आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से इसका सेवन करना चाहिए।

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कुछ दिन बाद मुझे ऑनलाइन एक शख्स मिला। इस शख्स की लंबी दाढ़ी थी और सिर पर लंबे बाल थे। ये शख्स उस फल को लाने के लिये हमेशा कोंगो के जंगलों में आता जाता रहता था। मैंने उससे बात की और कुछ कम पैसों में ही उसे मना लिया। कुछ दिन बाद उसने मेरे घर उस जादुई फल का थोड़ा सा मिश्रण भिजवा दिया। जब ये मिश्रण आया तो मैं काफी नर्वस था। मैं अंदर से डरा हुआ था, लेकिन मुझे ये भी पता था कि मेरे पास खोने के लिये कुछ नहीं है। फिर उस रात बड़ी हिम्मत करके मैंने इसे खाना शुरू कर दिया।

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एक हफ्ते बाद, मैं हर रोज की तरह सुबह उठा और शीशे की तरफ जाने लगा। मुझे पता था कि रोज की तरह आज भी मुझे शीशा निराश ही करेगा। जैसे ही मैंने अपने सिर की तरफ थोड़ा ध्यान दिया तो मेरी आंखे खुली की खुली रह गईं। क्या ये सच था… मेरे सिर पर बाल फिर से उग रहे थे।

मेरी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं था, लेकिन ये डर भी मेरे दिल में था कि कहीं ये नए बाल कुछ वक्त के लिये ही ना हों.ऐसा ना हो कि ये जैसे उगे हैं वैसे गिर भी जाएं ? इसी शक को दूर करने के लिये मैंने बाल उगाने के इस एक जादुई फॉर्मूले को अगले हफ्ते भी खाना जारी रखा।

अद्भुत! दूसरा हफ्ता आते आते मेरा सिर जहां-जहां से गंजा हो चुका था, वो छोटे छोटे नए बालों से भरने लगा! मैं पूरी तरह से शॉक्ड था, नए बाल और वो भी सिर्फ 2 हफ्ते में ? मैंने बतौर डॉक्टर और बाल झड़ने वाले शख्स के तौर पर इतने सालों में ये पहली बार देखा था।

सबसे बढ़िया पार्ट तो तब आया जब मैं इस हेयर री-स्टोरेशन ट्रिक को इस्तेमाल करते तीसरे हफ्ते में पहुंच गया। मैं और मेरी पत्नी दोनों शॉक्ड रह गए, जब हमने देखा कि मेरी हेयरलाइन फिर से बालों से भर गई है और जहां जहां से बाल टूट रहे थे वहां पर वो घने हो गए हैं, ऐसा सालों में पहली बार हुआ था। मेरे बाल क्या उगना शुरू हुए मेरी पत्नी का मेरी तरफ व्यवहार बिलकुल बदलने लगा, मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरी लव लाइफ इतनी अच्छी हो गई जितनी कभी भी नहीं थी।

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बिस्तर से उठते ही मूत्र त्याग के पश्चात उषा पान अर्थात बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित कई रोगों से हमारा बचाव करती है।

भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

*Dr. Nuskhe के ऑफिशियल Telegram चैनल/ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें* https://t.me/joinchat/ScaXZB0TMpR30OzUG_IuTQ

यदि #नींद न आने की शिकायत है, तो रात्रि में सोते समय तलवों पर सरसों का तेल लगाएँ।*

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ankit1985

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