घरेलू नुस्खे मिनटों में खत्म कर देगा आपका सिर दर्द

भाग दौड़ की जिंदगी, धूप और गर्मी में सिर दर्द आम समस्या है। प्राय: लोगों को सिर दर्द की समस्या होती है। हमेशा सिर दर्द के लिए अंग्रेजी दवा लेना नुकसानदायक भी हो सकता है। आयुर्वेद चिकित्सक अखिलेश कुमार विजय कहते हैं कि आयुर्वेदिक पद्धति से देशी नुस्खे का इस्तेमाल भी सिर दर्द से निजात पाने में सहायक हो सकता है। 

 

 

सिर दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए लौंग के पाउडर में नमक मिलाकर पेस्ट बनायें और दूध के साथ पियें। कुछ मिनटों में सिर दर्द कम हो जाएगा। लौंग पीसकर सिर पर लेप भी लगा सकते हैं। लहसुन एक प्राकृतिक दर्द निवारक औषधी है। लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर निचोड़ लें और उसका रस पी लें। इससे भी सिर दर्द आराम हो जाएगा। सिर दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से भी होता है। इस तनाव को कम करने के लिए गर्दन, सिर और कंधों की मालिश करें। अगर सिर दर्द की समस्या लगातार होती हो तो सुबह सेब पर नमक लगाकर खाली पेट खायें। इसके बाद गुनगुना दूध पी लें। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से सिर दर्द से छुटकारा मिल सकता है। तुरंत सिर दर्द से राहत के लिए एक सिर पर रखने और हटाने से राहत मिलेगी। सिर में भारीपन रहता हो तो लौंग, इलांयची और अदरक डालकर चाय बनायें और पीयें।

 

लोगों को अनियमित जीवनशैली से होने वाले रोगों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और हार्ट फेल जैसी बीमारियों के बारे में पता होगा, लेकिन बहुत से लोगों ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर पेट की आंतों या पेट के कैंसर के बारे में नहीं सुना होगा। नई तकनीकों से इसका उपचार आसान हो गया है।  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी जीआई कैंसर भारत में चौथा सबसे अधिक लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है। यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करता है। यह साइलेंट किलर के रूप में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय, भोजन नली पेट गुर्दे, पित्ताशय की थैली, पैनक्रियाज या पाचक ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्स और गुदा को प्रभावित करता है। इससे पीड़ित लोगों को शुरू में पेट दर्द, अपच रहना, मलोत्सर्ग की आदत में गड़बड़ी आदि का सामना करना पड़ता है। इन्हें नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो जाती है।

 

सबसे बड़ी जरूरत लोगों में इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करना और उन्हें स्वस्थ पाचन तंत्र के महत्व को समझाना है। अभी जीआई कैंसर के संबंध में लोगों में जागरूकता की कमी है। मरीजों की देखभाल का समूचा ईकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। इस ईकोसिस्टम के तहत मरीजों की जल्द से जल्द जांच, आधुनिक तरीकों से मरीजों का इलाज और उनके दर्द को कम करने वाली बेहतर देखभाल को प्रोत्साहन देना चाहिए

रोग के प्रारंभिक लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव की सलाह देते हैं। इसके तहत पोषक आहार लेना, व्यायाम करना आदि शामिल हैं। इसमें मरीजों की समय से जांच को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

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ankit1985

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