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आयुर्वेद के अनुसार मायोपिया के लक्षण और उपचार

By on July 11, 2016

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आजकल अधिकाश लोगों की आंखों में रिफ्रैक्टिव विकार यानि किरणों के वक्र की समस्या के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। इसमें निकट दृष्टि दोष यानि मायोपिया  से सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हैं। चिकित्सकों के अनुसार, बचपन में देखने की क्षमता का विकास और किशोरावस्था में आंख की लंबाई बढ़ती है लेकिन निकट दृष्टि दोष होने की वजह से यह कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में आंख में जानेवाला प्रकाश रेटिना पर केंद्रित नहीं होता। इसी वजह से तस्वीर धुंधली दिखाई देती है लेकिन इस दोष को कॉन्टेक्ट लेंस या सर्जरी से ठीक कराया जा सकता है।

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जिन लोगों को 2 मीटर या 6.6 फीट की दूरी के बाद चीजें धुंधली दिखती हैं उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है। एशियाई शहरों में करीब 10 से 12 प्रतिशत विद्यार्थी इस समस्या से ग्रस्त होते हैं, इसकी वजह से वह अपनी आंखों की रोशनी भी खो सकते हैं। मायोपिया अगर गंभीर ना हो तो चश्मा लगाकर या कॉन्टेक्ट लेंस लगाकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा अगर स्थिति गंभीर हो तो ऐसी स्थिति में रिफ्रैक्टिव सर्जरी ही इसका उपचार है।

मायोपिया के प्रकार-

स्यूडोमायोपिया

इस तरह का मायोपिया कार्य के दौरान ज्यादा फोकस करने से होता है। यह विडियो गेम या कंप्यूटर पर ज्यादा वक्त बिताने वाले बच्चों या युवाओं में होता है।

साधारण मायोपिया

यह सबसे आम निकट दृष्टि दोष है। इसमें आंख लंबी हो जाती है।

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इनड्यूस्ड मायोपिया

यह शरीर में ज्यादा दवाओं के इस्तेमाल या ग्लूकोज की ज्यादा मात्रा की वजह से होता है।

नोक्टूरनल मायोपिया

इस तरह का मायोपिया दिन से ज्यादा कम रोशनी या रात के समय देखने में परेशानी करता है।

डिजनेरेटिव मायोमिया

यह मायोपिया समय के साथ गंभीर होता जाता है और बढ़ता जाता है। इस तरह का मायोपिया अंधत्व का भी कारण होता है।

मायोपिया के लक्षण

  • आंखों का भैंगा होना
  • चक्कर आना
  • दूरी पर लिखे अक्षर न पढ़ पाना
  • सिर में दर्द रहना
  • बच्चों को स्कूल में ब्लैक बोर्ड पर लिखा हुआ न दिखना
  • टेलीविजन धुंधला दिखना

मायोपिया के कारण

ऐसे लोग जो निकट दृष्टि दोष की समस्या से परेशान हैं यानि कि जिन्हें थोड़ी दूर की चीजें भी साफ दिखाई नहीं देतीं, उसे रिफरेक्टिव एरर  कहते हैं। मायोपिया से ग्रस्त लोगों में आईबॉल बहुत लंबी हो जाती है या फिर कॉर्निया  बहुत ज्यादा कर्वी हो जाता है जिससे आंख में पहुंचने वाला प्रकाश ठीक तरह से फोकस नहीं कर पाता। ऐसे में किसी भी चीज की तस्वीर, रेटिना पर न बनकर, उसके सामने बन जाती है जिससे चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। यह समस्या उम्र के साथ बढ़ती जाती है। मायोपिया की समस्या से जूझ रहे लोग चश्मा या कांटेक्ट लैंस के जरिये समस्या से निजात पा सकते हैं लेकिन समस्या ज्यादा हो तो ऑपरेशन द्वारा मायोपिया का इलाज संभव है।

इसके अलावा निम्न कारण भी हैं:

  • लंबे समय तक एक ही लैंस का प्रयोग करना।
  • डायबिटीज  से ग्रसित होने पर।
  • आनुवांशिकी  कारणों से भी ऐसा हो सकता है।
  • किसी भी चीज को बहुत पास से घूरकर कार्य करना।
  • कम रोशनी में कोई कार्य करना, जैसे पढ़ना या टीवी देखना।

मायोपिया से बचाव के लिए सामान्य उपचार-

  • आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए आंवला का प्रयोग करें।
  • नारियल, मिश्री, सौंफ और बादाम को मिलाकर मिक्सर तैयार करें और पाउडर बनायें। दिन में दो बार खाएं।
  • लंबे समय तक टेलीविजन देखने या पढ़ने से बचें।
  • त्रिफला चूरन रोजाना लें।
  • ब्रीथिंग व्यायाम करें।
  • लिकरेसी की जड़ का पाउडर और शहद मिलाकर दूध के साथ लें।
  • प्रदूषण या धूप में निकलने से पहले आंखों पर चश्मा पहनें।
  • जहां काम करें, वहां पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।
  • मुंह में पानी भर कर आंखों को ताजे पानी से धोएं।

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