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आप लम्बे वक्त तक नहीं कर पाते हो सेक्स तो

मैं सहवास के दौरान एक मिनट से ज्यादा नहीं टिक पाता जबकि मेरे दोस्त का कहना है कि वह प्रवेश के बाद 30 से 45 मिनट तक सहवास कर लेता है। उसकी शादी हुए 20 साल हो चुके हैं और दो बच्चे भी हैं। क्या ऐसा संभव है? यदि हां, तो मेरे जैसे लोग अपना समय कैसे बढ़ा सकते हैं? क्या आपके द्वारा बताई गई दवाओं से ऐसा हो सकता है? हां, तो दवाई से ऐवरेज कितना समय बढ़ाया जा सकता है? क्या बिना दवा के भी टाइम बढ़ाने के तरीके हैं? वैसे, आम आदमी का एवरेज टाइम कितना होना चाहिए?

प्रवेश के बाद सहवास का समय आधा घंटा नहीं बल्कि कई लोगों का तो एक घंटे तक भी चला जाता है। पर, ऐसी स्थिति को विलंबित स्खलन की समस्या कहते हैं। आपके मामले में आप जरूरत से ज्यादा जल्दी चरमसीमा पर पहुंच जाते हैं। अगर आप इस अवधि को लंबा करना चाहते हो तो वह भी मुमकिन है। अगर तुंरत फायदा चाहें हो तो बाजार में इसके लिए एलोपैथिक दवाएं मिलती हैं, जैसे डिपॉक्सिटिन-60 मिलीग्राम। सहवास से एक घंटे पहले इसकी एक गोली एक गिलास पानी से लें। ज्यादातर लोगों में तो इसी से शीघ्र स्खलन में आराम आ जाता है और सहवास की अवधि बढ़ जाती है।

लेकिन बात तो ये है की

हकीकत में तो सहवास का समय इतना होना चाहिए कि आपके पार्टनर को पूरी संतुष्टि मिल जाए। अगर न मिले तो अन्य तरीकों से अपने पार्टनर को संतुष्ट कर देना चाहिए। ऋषि वात्स्यायन का कहना है कि यदि कोई अपने पार्टनर को सामान्य तरीके से सहवास का आनंद नहीं दे पाता या चरम सीमा तक नहीं पहुंचा पाता तो उसे चाहिए कि वह अपनी पत्नी को पाणिमंथन या हस्तमैथुन, औपरिष्टिकम या मुखमैथुन अथवा अपद्रव्य या कृत्रिम लिंग के प्रयोग से संतुष्ट कर देना चाहिए। जरूरी बात यह नहीं है कि सहवास कितना लंबा चलता है, बल्कि कितना आनंददायी या सुखदायी हो पाता है।

हकीकत में सहवास की क्रिया को संस्कृत में संभोग कहा गया है, जिसका मतलब है दोनों पार्टनर्स को समान आनंद की प्राप्ति होना। अगर डिपॉक्सिटिन की गोली कारगर नहीं होती तो उसकी जगह दूसरी गोलियां भी मिलती हैं। जैसे क्लोमीप्रोमिन की 10 से 25 मिलीग्राम की एक गोली दिन में सिर्फ एक बार सहवास से 8 घंटे पहले पानी से लेनी चाहिए। हालांकि इस गोली से कई लोगों नींद, नशा-सा और मुंह में सूखापन महसूस हो सकता है।

अगर कोई चाहता है कि उसका पर्मानेंट इलाज हो जाए तो उसके लिए और उपाय भी हैं। मिसाल के तौर पर योग में वज्रोलि और अश्विनी मुद्रा। इन मुद्राओं को करने के दौरान जिन स्नायुओं का उपयोग होता है उनसे शीघ्र स्खलन पर कंट्रोल किया जा सकता है। लंबे समय तक इन्हें करते रहने से शीघ्र स्खलन में आराम आ जाता है। ये मुद्राएं चरमसीमा को विलंबित या देर से लाने या देर तक सहवास करने में मदद करती है। ट्यूबोकोकसीजियस नामक एक्सर्साइज भी अगर नियमित रूप से करें तो 8 से 12 हफ्तों में काफी फायदा दिखाई देने लगता है। इस विधि को डॉक्टरों या इंटरनेट से भी सीख सकते हैं।

इसके अलावा यूनानी पद्धति के अनुसार शीघ्र स्खलन वाले लोग अगर पेशाब करते वक्त रोक-रोककर पेशाब करने की आदत डालें तो उससे भी सहवास का समय बढ़ाया जा सकता है। उनका मानना है कि दिमाग यह नहीं समझता है कि पेशाब जा रहा है या सीमेन। दिमाग को तो यही लगता है कि कोई तरल पदार्थ ही निकल रहा है। इन मुद्राओं का अभ्यास करने से जैसे पेशाब करने में कंट्रोल आ जाता है वैसे ही वीर्य स्खलन में भी कंट्रोल आ जाएगा।

जहां तक सहवास के ऐवरेज टाइम की बात है तो उसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। जैसे नॉर्मल बॉडी टेम्प्रेचर 98.4 डिग्री कहा जाता है। पर, दस आदमियों का माप लो तो एग्जेक्ट इतना शायद एक ही में मिलेगा। तो जैसे टेम्प्रेचर का कोई ऐवरेज नहीं होता वैसे ही सहवास के समय की बात भी है। हां, यह समय इतना जरूर होना चाहिए कि आपके पार्टनर को संतुष्टि मिल जाए। अगर सहवास से संतुष्टि नहीं मिलती तो अन्य तरीकों से पार्टनर को संतुष्ट कर दें, क्योंकि महत्वपूर्ण बात संतुष्टि है न कि संभोग का लंबा वक्त। दवाई की के प्रयोग से तो आप उस लेवल पर आ जाते हैं जिस लेवल पर आप पहुंचना चाहते हैं। हालांकि वह लेवल भी तर्कसंगत लेवल होना चाहिए। आधा घंटा या एक घंटा तर्कसंगत या जरूरी नहीं माना जा सकता। अगर आपके पार्टनर को 5 मिनट में संतोष हो जाता है तो उतना वक्त ही काफी होता है।

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