‎लकवा‬ रोग की प्राकृतिक व आयुर्वेदिक चिकित्सा

By on November 21, 2015

paralysis

‎पक्षाघात_फालिज‬ तथा अंग्रेजी में ‪‎पैरेलिसिस‬ के नाम से जाना जाने वाला रोग ‘लकवा’ वास्तव में कोई रोग नहीं है बल्कि मस्तिष्क, रीढ़ या किसी स्ायु-विशेष के रोग से ही उसके अधीनस्थ में जड़ता आने को लकवा कहकर पुकारा जाता है।
यह सभी जानते हैं कि मस्तिष्क शरीर के संचालन का केन्द्र है। मस्तिष्क और शरीर का संबंध अत्यन्त सूक्ष्म नाड़ियों द्वारा बना रहता है जिसे स्ायु संस्थान (नर्वस-सिस्टम) कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य शरीर में 72,000 नाड़ियों हैं। ये नाड़ियां चेतना-तंतु के रूप में मस्तिष्क द्वारा भेजे गये संदेशों को सारे शरीर में त्वरित गति से पहुंचाती हैं। सूचना के आदान प्रदान और संतुलन से शरीर अपना कार्य ठीक तरह से संपादित करता है। यदि किसी कारणवश बीमारी, चोट या सदमे के कारण मस्तिष्क अपने आदेश शरीर के अंगों को नहीं भेज पाता है तो इस अवस्था में शरीर के अंग अपना हलचल नहीं कर पाते और वे बेकार हो जाते हैं। इसी अवस्था को लकवा या फॉलिज कहते हैं।
लकवा होने का कारण

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