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चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं. जैसे दाद, खाज, खुजली, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि. कई मामलों में एक अच्छे डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित होता है. लेकिन कई बार घरेलू उपचार से भी रोग ठीक कर सकते हैं. आयुर्वेद की मानें तो आजकल वात रोग बहुत ज्यादा फैलते हैं.

घरेलू उपाय

नहाते समय नीम के पत्तों को पानी के साथ गरम कर के, फिर उस पानी को नहाने के पानी के साथ मिला कर नहाने से चर्म रोग से मुक्ति मिलती है.

हर रोज़ मूली खाने से चेहरे पर हुए दाग, धब्बे, झाईयां, और मुंहासे ठीक हो जाते हैं.

त्वचा रोग में सेब के रस को लगाने से उसमें राहत मिलती है. प्रति दिन एक या दो सेब खाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं.

त्वचा का तैलीयपन दूर करने के लिए एक सेब को अच्छी तरह से पीस कर उसका लेप पूरे चहरे पर लगा कर दस मिनट के बाद चेहरे को हल्के गरम पानी से धो लेने पर “तैलीय त्वचा” की परेशानी से मुक्ति मिलती है.

त्वचा के घाव ठीक करने के लिए नीम के पत्तों का रस निकाल कर घाव पर लगा कर उस पर पट्टी बांध लेने से घाव मिट जाते हैं.

मूली के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से किसी भी प्रकार के त्वचा रोग में राहत हो जाती है.

प्रति दिन तिल और मूली खाने से त्वचा के भीतर जमा हुआ पानी सूख जाता है, और सूजन खत्म खत्म हो जाती है.

खाज और खुजली की समस्या में ताज़ा सुबह का गौमूत्र त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है.

जहां भी फोड़े और फुंसी हुए हों, वहां पर लहसुन का रस लगाने से आराम मिल जाता है.

लहसुन और सूरजमुखी को एक साथ पीस कर पोटली बना कर गले की गांठ पर (कण्ठमाला की गील्टियों पर) बांध देने से लाभ मिलता है.

नीम की कोपलों (नए हरे पत्ते) को सुबह खाली पेट खाने से भी त्वचा रोग दूर हो जाते हैं.

मूली का गंधकीय तत्व त्वचा रोगों से मुक्ति दिलाता है.

मूली में क्लोरीन और सोडियम तत्व होते है, यह दोनों तत्व पेट में मल जमने नहीं देते हैं और इस कारण गैस या अपच नहीं होता है.

मूली में मैग्नेशियम की मात्रा भी मौजूद होती है, यह तत्व पाचन क्रिया नियमन में सहायक होता है. जब पेट साफ होगा तो चमड़ी के रोग होने की नौबत ही नहीं होगी.

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