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बवासीर एक खतरनाक बीमारी है। इसे किसे बताने में भी शर्म आती है। यह सौ प्रतिशत सच है। हमारे गाँव में कोई ऐसा बवासीर का मरीज़ नहीं रहा जिसे दादी ने अपने नुस्खे से ठीक न कर दिया हो। दादी का यह नुस्खा, है तो आयुर्वेद का ही अंग लेकिन है बिल्कुल घरेलू। आइए जानें, बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार क्या है।
बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार:
कैसे बनाएं औषधि:
# अरीठा यानी रीठा लें। उसके बीज बाहर करें और शेष हिस्से को लोहे की कढ़ाही में डालकर उसे भूनकर पूरी तरह जला दें। जब वह कोयला बन जाए उसे आग से उतार लें।
# उसी के बराबर उसमें पपडिया कत्था मिलाकर बहुत बारीक पीस लें। बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार की औषधि तैयार हो गई।
ये है इसके सेवन की विधि:
# औषधि में से प्रतिदिन सुबह-शाम 125 मिलीग्राम यानी लगभग एक रत्ती मक्खन या मलाई के साथ सात दिन लगातार सेवन करना ज़रूरी है।
# इसे लेने से कब्ज़ व खुजली से भी मुक्ति मिल जाती है। दादी कहती थीं कि यदि हर छह महीने पर सात दिन लगातार यह दवा खा ली जाए तो ज़िंदगी में कभी बवासीर नहीं होगा।
ये है परहेज़:
# इसका सेवन करने के दौरान सात दिन तक नमक बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
# उरद, घी, सेम, गरिष्ठ तथा भुने पदार्थों का सेवन कतई न करें।
# धूप, आग तापना, पाद को रोकना, साइकिल चलाना, संभोग व कड़े आसन पर बैठने से बचना चाहिए।

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