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1 पैदल चलना – पैदल चलना यानि टहलना और हल्का फुल्का ही सही लेकिन व्यायाम करना आपके ब्लड शुगर के बढ़ते स्तर को कम कर सकता है। अत: रोजाना सुबह शाम टहलने की आदत डालें।>
2 हरी सब्जियां –  हरी सब्जियां जैसे पालक, करेला, लौकी, गोभी आदि का सेवन करें। इनमें विटामिन्स, बीटा कैरोटीन और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होती है जो शुगर में लाभकारी है।>
3 मेथीदाना – मेथीदाने का सेवन रक्त में शुगर के स्तर को कम करने में बेहद फायदेमंद है। रोजाना इसका सेवन करने से शुगर का स्तर नियंत्रण में रहेगा।
4 जौ का सेवन – जौ फाइबर से भरपूर होती है और शरीर में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को लंबे समय तक मेटाबोलइज करने में मददगार है। रोजाना इसे किसी न किसी रूप में आहार में शामिल करें।
5 विटामिन डी – रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए शरीर में विटामिन डी का स्तर बनाए रखें। विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है।
डायबिटीज एक खतरनाक बीमारी है और इसे सारी बीमारियों की जड़ भी कहा जाता है। अगर एक बार डायबिटीज किसी को हो गई तो यह जिंदगी भर उस शख्स को घेरे रखती है।
कई बार तो लोगों को पता ही नहीं चलता की वे इस बीमारी के मरीज हो चुके हैं, ऐसे में वे शारीरिक क्षमता में जरूर कमी महसूस करते हैं, लेकिन इसके बारे में पता नहीं चलना बहुत बार खतरनाक भी सिद्ध होता है।
7. मूडी और गुस्सैल होना- ब्लड में शुगर लेवल के ठीक ना होने पर मरीज अक्सर मूडी हो जाता है और उसे जल्दी गुस्सा आने लगता है। डायबिटीज के पेशेंट के लक्षण और डिप्रेशन के पेशेंट के लक्षण काफी हद तक एक जैसे ही लगते हैं। मरीज का बाहर जाने का मन नहीं करता, कुछ करने का मन नहीं करता, केवल सोने का मन करता है।
8. ठीक से ना देख पाना- डायबिटीज के शुरुआती स्टेज में ठीक तरह से देखने में दिक्कत होती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे आंखों की रोशनी के खत्म होने का डर है। 6 से 8 हफ्ते के बाद ब्लड शुगर के स्थिर होने पर आंखों से ठीक दिखने लगता है।
9. पैरों में झनझनाहट होना- डायबिटीज के कारण पैरों में झनझनाहट महसूस होने लगती है।
10. इंफेक्शन का जल्द ठीक ना होना- शरीर में ग्लूकोज की कमी के कारण, बीमारियों से लडऩे की क्षमता भी कम हो जाती है जिसके कारण स्किन इंफेक्शन के साथ और कई तरह के इंफेक्शन भी हो जाते हों जल्दी ठीक नहीं होते।
 
मधुमेह के कारण –
1. तनाव और मानसिक परेशानी की वजह से रक्त में शर्कंरा की मात्रा बढ़ जाती है,जिस वजह से मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है।
चित्र में ये शामिल हो सकता है: भोजन
2. रात को देर तक जागना और रात को देर से भोजन करना भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा देता है।
3. अधिक तेलीय ,तले हुए,शक्कर युक्त भोज्य पदार्थों के सेवन से भी मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। आनुवांशिक कारणों से भी यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी होता रहता है।
4. जिन लोगो की दिनचर्या में अधिक देर तक बैठे रहना पड़ता है,यह रोग उन व्यक्तियों को जल्दी होता है।
5. नशीले पदार्थों और अधिक मात्रा  में धूम्रपान का सेवन भी इस रोग को आमंत्रित करता है।
 6. असंतुलित भोजन करने से अधिक मात्रा में मीठा खाने से भी शक्कर  का स्तर रक्त में बढ़ जाता है। और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
आयुर्वेदिक औषधि / घरेलू नुस्खे –
दालचीनी – दालचीनी का  नियमित रूप से प्रयोग रक्त में शकज़्रा की मात्रा  को संतुलित करता है।इसका प्रयोग  हम मसाले के  रूप में सब्जियों में डालकर आसानी से कर सकते है। और मधुमेह को  नियंत्रण में रख सकते है।
मेथी के लड्डू – मेथी में एमिनो एसिड ,पोटाशियम  और फाइबर बहुत अधिक मात्रा  में पाया जाता है जो की शुगर को नियंत्रित करने में बहुत कारगर होता है। मेथी के दानो को पीस कर, एक चमच्च चूणज़्  खाना खाने से आधा घंटा  पहले नियमित रूप से लेने पर मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है।  चूँकि ये कड़वी होती है इसलिए इसको भून कर गुड मिलाकर लड्डू बनाकर भी खा सकते है।
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