फ्रोजेन शोल्डर की पहचान और उपचार आयुर्वेद से

फ्रोजेन शोल्डर यानी कंघे में अकड़न। आजकल ये बीमारी आम हो गई है। अगर किसी व्यक्ति के कंधें अकड़ जाते हैं सही तरह से काम नहीं करते, किसी भी काम को करने में या सामान को उठाने में रोगी को कंधों में बहुत तेज दर्द होता है तो वह फ्रोजेन शोल्डर नामक बीमारी से ग्रसीत हो सकता है।

इसके कारण :
फ्रोजेन शोल्डर कई कारणों से हो सकता है। एक सर्वे के मुताबिक फ्रोजेन शोल्डर वर्किंग क्लास और कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों में अधिक पाई जाती है। इसके अलावा काफी समय तक कंधे एक ही पॉजीशन में रखना, बहुत देर तक एक की कंधे पर अधिक भार उठाए रखना, कंधे से बहुत ज्यादा काम न लेना, हड्डियों का कमजोर होना। इतना ही नहीं कई बार फ्रोजेन शोल्डर की समस्या कंघे को किसी तरह का आघात और चोट लगने पर भी होने लगता है।

 

फ्रोजेन शोल्डर के लक्षण :

फ्रोजेन शोल्डर के दौरान कंघा बिल्कुल सूज जाता है और अकड़न के कारण कठोर हो जाता है जिससे हाथ हिलाना बहुत मुश्किल होता है और हिलाने पर तीव्र दर्द होने लगता है। कंधे को किसी भी दिशा में मोड़ने में रोगी को बहुत दिक्कत होती है। कंधे का दर्द रोगी की गर्दन और उसके ऊपर के भाग में फैल जाता है। हाथ की काम करने की गति बहुत धीमी हो जाती है और रात के समय दर्द अधिक परेशान करने लगता है। छोटे-छोटे काम जैसा कंघी करना, बटन बंध करना इत्यादि करना भी मुश्किल हो जाता है। हाथ को पीछे की ओर करना होता है तो उसके कंधे में बहुत तेज दर्द होता है। कई बार फ्रोजन शोल्डर के तहत बहुत ज्यादा सूजन और तेज दर्द अचानक शुरु हो जाता है और कंघे में ऐंठन उत्पन्न होने लगती है जो कई मिनटों या फिर घंटो तक भी रह सकती है। यह समय कई महीनों या सालों तक भी हो सकती है।

 

फ्रोजेन शोल्डर की संभावनाएं :

फ्रोजेन शोल्डर के कारण कई और समस्याएं जैसे अवसाद, गर्दन और पीठ दर्द, थकान, काम करने में असमर्थ इत्यादि समस्याएं भी हो सकती है। फ्रोजेन शोल्डर से रोगी को मधुमेह, दौरा पड़ना, फेंफड़े का रोग, संयोजी ऊतक विकार और हृदय रोग अधिक होने का डर रहता है। यह बीमार पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक पाई जाती है और 40 साल से कम उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलती है।

इसका इलाज :

हालांकि फ्रोजेन Shoulder का इलाज संभव है। इसमें शारीरिक चिकित्सा, औषधि, मालिश चिकित्सा, शल्य-चिकित्सा, सर्जरी इत्यादि की जाती है लेकिन जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें कई महीनों तक या अधिक लंबे समय तक काम करने में एवं सामान्य जीवन की गतिविधियों के संबंध में अत्यधिक कठिनाई होने की संभावना रहती है।

 

एतिहायत और रोकथाम:

इस बीमारी के होने के दौरान कंधें के हल्के-फुल्के व्यायाम बेहद जरूरी है। खान पान का खास ध्यान रखें और ताजा फल-सब्जियां, जूस और पॉष्टिक आहार का सेवन जरूरी है। गर्म पानी से सिंकाई करनी चाहिए। प्रतिदिन मसाज करना भी बेहतर उपाय है। रात के समय में कम से कम 1 घण्टे तक ठंडा लेप कंधे पर करना चाहिए। फ्रोजेन शोल्डर के तहत जरूरी है कि कंधे के दर्द को कम किया जाए और कंधे में मूवमेंट लाई जाए। हालांकि कंघों में दर्द या अकड़न से निजात पाने के लिए योग भी किया जा सकता है इसमें पर्वतासन सबसे अच्छा रहता है जो कंघों की अकड़न दूर करने के साथ-साथ रीढ़ के सभी जोड़ों के बीच का तनाव कम होता है। लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है क्योंकि जरा सी लापरवाही आपको जोखिम में डाल सकती है।

कंधे का दर्द कोई भयंकर रोग नहीं है, थोड़ी सा सावधानी बरतकर फ्रोजेन शोल्डर जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है साथ ही कंधे में थोउ़ी सी तकलीफ होते ही समय पर इलाज न कराया जाए तो कंघें का नाजुक दर्द फ्रोजन शोल्डर रोग होने का खतरा बन जाता है।

ankit1985

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