दांतों को रखना हो दुरुस्त तो इन चीज़ो पर दें ध्यान

हमारी सेहत, स्वाद और सुंदरता, इन तीनों के लिए दांतों का सही-सलामत रहना बेहद जरूरी है। दांतों की…

दांतों को रखना हो दुरुस्त तो इन पर दें ध्यान
हमारी सेहत, स्वाद और सुंदरता, इन तीनों के लिए दांतों का सही-सलामत रहना बेहद जरूरी है। दांतों की बीमारियों के लिए तमाम इलाज मौजूद हैं। वक्त के साथ कई नई तकनीक भी शामिल हो रही हैं, जो दांतों के इलाज को आसान और बेहतर बना रही हैं।सुंदर दांत हमारी शख्सियत को निखारते हैं। अगर दांतों की कोई समस्या हो तो न सिर्फ दिखने में खराब लगते हैं, बल्कि खाना-पीना भी मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर दांतों से जुड़ीं 2 तरह की समस्याएं होती हैं: 1. मसूढ़ों से जुड़ीं, 2. दूसरी दांतों संबंधी।

मसूढ़ों की बीमारियां

पायरिया

पायरिया मसूढ़ों और हड्डी की बीमारी होती है। इसमें सांसों से बदबू और दांतों से खून आता है। शुरुआत में दर्द नहीं होता इसलिए बीमारी बढ़ती जाती है। वक्त पर इलाज न हो तो आगे जाकर दांत हिलने लगते हैं और निकल भी जाते हैं। इसकी मुख्य वजह ढंग से सफाई न करना है। हालांकि डायबीटीज या पैरंट्स में किसी को पायरिया होना भी वजह हो सकती है।

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नॉर्मल ट्रीटमेंट

स्केलिंग यानी मसूढ़ों की सफाई की जाती है। एक सिटिंग के लिए 900 से 3500 रुपये खर्च आता है। फिर मसूढ़ों और हड्डी के संक्रमित टिशूज को हटा दिया जाता है। इससे बीमारी वहीं थम जाती है और आगे नहीं बढ़ती। एक दांत के लिए करीब 600-1200 रुपये चार्ज किए जाते हैं। फिर दांतों को पॉलिश भी किया जाता है ताकि उन पर सफाई से बनने वाली बारीक लाइनों पर प्लाक जमा न हो और दांत स्मूद बने रहें। इस पूरे प्रोसेस में 3-4 सिटिंग्स तक लग जाती हैं।

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लेटेस्ट तकनीक

मोटे तौर पर ऊपर लिखा प्रोसेस ही किया जाता है, लेकिन नॉर्मल क्लीनिंग के बजाय लेजर क्लीनिंग की जाती है। इसमें ब्लीडिंग नहीं होती और दर्द भी नहीं होता। 2 सिटिंग्स में ट्रीटमेंट पूरा कर दिया जाता है। पूरे इलाज का खर्च आता है करीब 5000 रुपये। पायरिया से बचने के लिए बेहतर है कि हर 6 महीने में डेंटिस्ट को दिखाकर दांतों की क्लीनिंग करा लें।

बदरंग और धब्बेदार मसूढ़े

मसूढ़े अगर नॉर्मल पिंक कलर के न होकर नीले-जामनी जैसे या दाग-धब्बेदार होते हैं तो देखने में काफी खराब लगते हैं और खूबसूरती को कम करते हैं।

नॉर्मल ट्रीटमेंट

स्कैल्पिंग यानी मसूढ़ों के ऊपर की एक लेयर को हटा दिया जाता है, जिससे नीचे की साफ लेयर ऊपर आ जाती है। आमतौर पर 2-3 सिटिंग्स में इलाज होता है और हर सिटिंग के लिए 8-12 हजार रुपये तक चार्ज किए जाते हैं। कई बार दोबारा कराना पड़ सकता है।

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लेटेस्ट तकनीक

आजकल इसके लिए लेजर की मदद ली जाने लगी है। लेजर की मदद से डॉक्टर ऊपरी लेयर हटा देते हैं। इस प्रोसेस में दर्द बिल्कुल नहीं होता और रिजल्ट भी बेहतर है। अक्सर एक सिटिंग में ही काम पूरा हो जाता है। 10 से 15 हजार रुपये चार्ज किए जाते हैं। हालांकि इसका एक नुकसान यह है कि कई बार 2-3 साल में इस प्रोसेस को दोबारा कराना पड़ सकता है।

उठे हुए मसूढ़े

कई बार पैदाइशी तो कभी-कभार किसी बीमारी (मिर्गी आदि) या दवाओं (बीपी, इम्युनिटी की दवा आदि) के सेवन से मसूढ़े सूजे और उठे हुए नजर आते हैं।

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नॉर्मल ट्रीटमेंट

कंटूरिंग यानी मसूढ़ों की ऊपरी परत को छीलकर मसूढ़ों को एक लेवल में लाया जाता है। इसके लिए 2-3 सिटिंग्स लगती हैं और कुल 3-5 हजार रुपये खर्च आता है।

लेटेस्ट तकनीक

आजकल लेजर से कंटूरिंग की जाती है। इसमें एक ही सिटिंग में इलाज हो जाता है। हालांकि यह थोड़ा महंगा पड़ता है। मुंह के एक हिस्से के लिए 5-7 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

सेंसिटिविटी

दांतों में ठंडा-गर्म महसूस करने की समस्या काफी कॉमन है। इसकी वजह आमतौर पर दांतों की ऊपरी परत का हटना होता है जोकि बेहद हार्ड ब्रश यूज करने, बार-बार और ज्यादा देर तक ब्रश करने, दांतों का सही अलाइनमेंट में न होने, कार्बोनेटिड ड्रिंक्स (कोल्ड ड्रिंक्स आदि) ज्यादा पीने आदि से हो सकती है।

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नॉर्मल ट्रीटमेंट

सेंसिटिव टूथपेस्ट यूज करने की सलाह दी जाती है। इसमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होती है। यह 200-250 रुपये में मिल जाता है।

लेटेस्ट तकनीक

डी-सेंसिटाइजेशन तकनीक से दांतों पर ऐंटि-सेंसिटिविटी मटीरियल (डेंटीन बॉन्डिंग एजेंट) लगाते हैं। इससे दांतों की सेंसिटिविटी कम हो जाती है। 1-2 सिटिंग में काम पूरा हो जाता है और हर दांत के लिए 600-700 रुपये चार्ज किए जाते हैं। इस प्रोसेस को साल-दो साल में रिपीट कराना पड़ता है। इसके अलावा, लेजर से भी सेंसिटिविटी हटाते हैं। 800 से 1200 एक दांत का चार्ज किया जाता है।

ज्यादा मीठा खाने, सही से दांत साफ न करने, दांत कुरेदते रहने या फिर स्लाइवा के केरीज प्रोन होने पर दांतों में बैक्टीरिया लग जाता है जो केरीज या कैविटी (छेद) की वजह बनता है।

नॉर्मल ट्रीटमेंट

कैरीज होने पर पहले अमल्गम (सिल्वर/गोल्डन) फिलिंग की जाती थी, लेकिन बाद में कंपोजिट फिलिंग की जाने लगी। इसमें अल्ट्रावॉयलेट रेज की मदद से सेटिंग की जाती है। अगर कैविटी बहुत गहरी है तो रूट-कनाल किया जाता है। मैनुअली रूट-कनाल कराने पर 3-4 सिटिंग्स की जरूर पड़ती है, जिसमें 10-15 दिन लगते हैं। इसके लिए 2500 से 4000 रुपये तक चार्ज किए जाते हैं।

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लेटेस्ट तकनीक

अगर केरीज की वजह से सिर्फ वाइट दाग दिखने शुरू हुए हैं तो दांत में मिनरल कंटेंट बढ़ा देते हैं, ताकि कैविटी हो ही नहीं। इसके लिए री-मिनरलाइजिंग टूथपेस्ट (फ्लोराइड आदि) यूज करने की सलाह ही जाती है। यह करीब 1000-1500 रुपये का आता है। तकनीकी लिहाज से सबसे ज्यादा काम रूट-कनाल के फील्ड में हुआ है। यह अब पहले के मुकाबले काफी आसान और कम समय में होने लगी है। इसमें दर्द भी नहीं होता। नई तकनीक की रूट कनाल को सिंगल सिटिंग रूट कनाल कहा जाता है और इसे रोटरी मशीन से किया जाता है। शेप बेहतर आती है और एक ही सिटिंग में प्रोसेस पूरा हो जाता है। लेकिन सिंगल सिटिंग रूट कनाल तभी की जाती है, अगर दांत में ज्यादा इन्फेक्शन न हो। इसके लिए 4-8 हजार रुपये चार्ज किए जाते हैं। रूट कनाल के बाद कैप लगवाना जरूरी होता है। कैप में 5-15 हजार रुपये खर्च आता है।

दांतों पर दाग 2 तरह के होते हैंअंदरूनी और बाहरी। बाहरी दाग आमतौर पर खाने की आदतों से पड़ते हैं, मसलन चाय-कॉफी, पान, तंबाकू, हल्दी, मसाले आदि ज्यादा मात्रा में खाने से। अच्छी तरह ब्रश करने और फ्लॉस से सफाई करने से बाहरी दाग साफ हो जाते हैं। इन्हें ब्लीचिंग से भी खत्म किया जा सकता है, लेकिन अंदरूनी दागों को विनियर (लेमिनेशन) की मदद से छुपाया जा सकता है।

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बाहरी दागों के लिए

दांतों की बाहरी परत पर मौजूद दागों को हटाने के लिए ब्लीचिंग यूज कर सकते हैं। ब्लीचिंग सिर्फ नेचरल दांतों पर ही काम करती है, क्राउन, वेनर या फिलिंग वाले दांतों पर नहीं। ब्लीचिंग 2 तरह से होती है: ऑफिस ब्लीचिंग औप होम ब्लीचिंग। पहली बार ब्लीचिंग क्लिनिक से ही करानी चाहिए। फिर चाहें तो घर पर कर सकते हैं।

नॉर्मल ट्रीटमेंट

क्लिनिकल ब्लीचिंग 1-2 सिटिंग्स में होती है और इसके लिए 10-15 हजार रुपये खर्च होते हैं। होम ब्लीचिंग किट की मदद से घर पर भी ब्लीचिंग की जा सकती है। इस किट में ब्लीचिंग ट्रे और जेल होता है। यह किट कोलगेट और ओपेलसेंस आदि ब्रैंड्स की आती है। इसे डॉक्टर की सिफारिश पर ही लेना चाहिए। यह 5-7 हजार रुपये में मिल जाती है।

लेटेस्ट तकनीक

आजकल लेजर ब्लीच यूज की जाती है। इसमें करीब 45 मिनट का टाइम लगता है और ज्यादा वाइटनिंग होती है। इससे सेंसिटिविटी नहीं होती, जबकि नॉर्मल ब्लीचिंग से यह हो सकती है। हालांकि वह भी 2-3 दिन में खत्म हो जाती है। इसके लिए 15-25 हजार रुपये खर्च आता है।

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